Wednesday, September 3, 2008

सिमी पर श्वेत पत्र जारी करे केंद्र

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले आतंकवाद के मुद्दे पर संप्रग सरकार को घेरते हुए भाजपा ने बुधवार को केंद्र से सिमी पर श्वेतपत्र जारी करने, अफजल गुरु को अविलंब फांसी देने और फिर से पोटा कानून बनाने की मांग की।पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार एलके आडवाणी और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां भाजपा मुख्यालय में आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में यह मांग की। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने यहां जारी संयुक्त बयान में आरोप लगाया कि मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी की चार साल से अधिक की सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह विफल रही है और कुछ समय बाद जनता को उसके कार्यकाल पर अपनी राय देने का अवसर मिलेगा। दोनों नेताओं ने कहा कि मनमोहन-सोनिया की सरकार की सबसे बड़ी विफलता आतंकवाद से निपटने में रही और इस मामले से जिस तरह उसने निपटा है उसने आतंकवाद को प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहन दिया है। आडवाणी ने कहा कि संप्रग के इस आचरण के चलते पहले सीमा पार से चलने वाला आतंकवाद अब देश की धरती पर भी जड़ें जमा चुका है।दोनों नेताओं ने सरकार से तीन प्रमुख मांग की आतंकवाद के प्रति लोगों को सचेत करने के लिए सिमी पर श्वेतपत्र जारी किया जाए और उसमें वे सभी सामग्री उपलब्ध कराई जाए जो सरकार के पास हैं। आतंकवाद से निपटने के लिए पोटा और अन्य संबंधित कानून फिर से बनाए जाएं। संसद पर हमले के षड्यंत्रकारी अफजल गुरु को फांसी की सजा पर तुरंत तामील हो।मोदी ने इस बात पर रोष प्रकट किया कि गुजरात विधानसभा द्वारा दो बार पारित किए गए गुजरात संगठित अपराध कानून [गुजकोक] पर केंद्र लंबे समय से कुंडली मारे बैठी है। गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा कि अफसोस की बात यह है कि चुनी हुई विधानसभा द्वारा दो बार पारित कानून को केंद्र सरकार दबा के बैठी है। उसने इस बारे में एक जवाबी चिठ्ठी तक नहीं दी, सुझाव तो छोड़ो.. टाइम किलिंग कर रही है। मोदी ने कहा कि देश में आतंकवाद का एक नया तबका पैदा हो रहा है और यह बाहर से प्रायोजित आतंकवाद का तबका है, जिसे लागू करने वाले देश में हैं और यह बहुत बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि वोट बैंक की राजनीति आतंकवाद को प्रोत्साहन देने वाली सबसे बड़ी शक्ति बन गई है। उन्होंने दावा किया कि सिमी का नाम बदलकर इंडियन मुजाहिदीन इसलिए किया गया, ताकि उसमें 30 साल की समयसीमा की बंदिश न रहे।आडवाणी ने कहा कि सरकार यह स्वीकार करे कि सिमी और इस तरह के दूसरे संगठन राष्ट्र सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं और सरकार उन पर अंकुश लगाने तथा उनका विरोध करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को निर्दोष लोगों की सुरक्षा करने में अपनी विफलता और अयोग्यता के लिए क्षमा मांगनी चाहिए।

सिमी के चार लोग गिरफ्तार

जयपुर बम धमाकों की जांच कर रहे राजस्थान पुलिस के विशेष अनुसंधान दल [एसआईटी] ने प्रतिबंधित संगठन सिमी के चार और लोगों को गिरफ्तार किया है।अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए.के. जैन ने यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिबंधित संगठन सिमी की गतिविधियों में सहयोग करने वाले आरोपियों कोटा निवासी मुनव्वर हुसैन, अतीक, नदीम अख्तर और बारां निवासी मोहम्मद इलियास को सोमवार को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि चारों अभियुक्तों को जयपुर की एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया। अदालत ने चारों अभियुक्तों को 11 दिन के रिमांड पर एसआईटी को सौंप दिया।

Tuesday, September 2, 2008

बैंकाक में आपातकाल, कमान सेना के हाथ

बैंकाक। थाईलैंड के प्रधानमंत्री ने सोमवार रात सरकार विरोधी और समर्थक प्रदर्शनकारियों के बीच हुए हिंसक संघर्ष के बाद राजधानी बैंकाक में मंगलवार को आपातकाल घोषित कर दिया।सेना प्रमुख को कानून एवं व्यवस्था की कमान सौंप दी गई है। राजधानी में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाली मीडिया रिपोर्टो पर भी पाबंदी लगाई गई है। थाईलैंड रेडियो पर प्रधानमंत्री शामक सुंदरावेज की तरफ से की गई घोषणा को पढ़कर सुनाया गया। इस घोषणा में कहा गया है कि इन सभी समस्याओं का जल्द समाधान करने की जरूरत है इसलिए प्रधानमंत्री ने राजधानी बैंकाक में आपातकाल लागू कर दिया है।इस बीच, सिंगापुर तथा दक्षिण कोरिया की सरकारों ने अपने यहां के नागरिकों से थाईलैंड की यात्रा नहीं करने की सलाह दी है। सिंगापुर के विदेश मंत्रालय ने अपने देश के नागरिकों को जारी संदेश में कहा कि देश के नागरिकों के लिए अगर बहुत जरूरी नहीं हो तो वे थाईलैंड की यात्रा का कार्यक्रम आगे बढ़ा लें। दूसरी ओर दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने भी ऐसा ही संदेश जारी करके कहा है कि देश के जो लोग थाईलैंड की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं उनके लिए सलाह है कि वे वहां हालात ठीक होने तक इंतजार करें।गौरतलब है कि थाईलैंड में पिछले कई दिनों से सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे है। गवर्नमेंट हाउस के निकट सरकार विरोधी और समर्थक प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई तथा 34 अन्य घायल हुए है। इस दौरान दो लोग गोली लगने से जख्मी हुए। पुलिस और सैनिकों की मुस्तैदी की वजह से हालांकि यह संघर्ष ज्यादा देर तक नहीं चल सका मगर इसकी आंच से घबराई सरकार को आपातकाल लागू करने का सख्त कदम उठाना पड़ा। सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रही पीपुल्स अलायंस फॉर डेमोक्रेसी का आरोप है कि सुंदरावेज अपनी पार्टी के पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा को भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त कराने की कोशिश कर रहे ह

मच्छर प्रजनन पाए जाने पर चालान

राजधानी में डेंगू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए दिल्ली सरकार ने मच्छर प्रजनन पाए जाने पर तुरंत चालान काटने के निर्देश दिए है। दिल्ली के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री योगानंद शास्त्री ने दिल्ली सचिवालय में एक उच्च स्तरीय बैठक में राजधानी में जल और कीटाणु जनित रोगों की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में दिल्ली नगर निगम, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद, दिल्ली जल बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।बैठक के बाद डॉ. शास्त्री ने बताया कि स्वास्थ्य अधिकारियों को मकानों और सरकारी भवनों पर मच्छर की उत्पत्ति पाए जाने की स्थिति में सीधे चालान काटने के निर्देश दिए गए है। उन्होंने अधिकारियों को सार्वजनिक स्थानों पर पानी इकट्ठा होने की स्थिति पर खास ध्यान देने की हिदायत दी है। डॉ. शास्‍त्री ने कहा कि अभी तक डेंगू के 60 मामले राजधानी में प्रकाश में आए है। डेंगू की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों को कीटनाशक धुँआ और दवा छिड़काव के काम में तेजी लाने का निर्देश देने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में अधिक संख्या में कर्मचारियों को तैनात करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में प्लेटलेट की कोई कमी नहीं है और सरकार इसकी सुचार उपलब्धता बनाए रखने पर निरंतर निगाह रखे हुए है।इसके अलावा हैजा प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निरीक्षण करने के लिए भी अधिकारियों से कहा गया है। डॉ. शास्‍त्री ने बताया कि हैजे के इस माह 139 मामले दर्ज किए गए है। प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करने के साथ-साथ क्लोरिन की गोलियों के वितरण की उचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए है। प्रभावित क्षेत्रों का दौरा दिल्ली जल बोर्ड तथा दिल्ली नगर निगम की संयुक्त टीमें करेंगी। डॉ. शास्त्री ने बताया कि नजफगढ, पश्चिमी जोन और करोल बाग के अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। इन क्षेत्रों में सफाई तथा कीटनाशक धुँए की उचित व्यवस्था करने की निगम के अधिकारियों को हिदायत दी गई है। उन्होंने निगम के अधिकारियों को खुले स्थान पर बिकने वाले गन्ने के रस तथा कटे फलों की बिक्री पर रोक लगाने की दिशा में कडे़ कदम उठाने को कहा है। इस महीने मलेरिया के 22 मामले दर्ज हुए है।







जिंदा दफन की गईं महिलाओं के शव निकाले

इस्लामाबाद : पाकिस्तान के दक्षिण पश्चिमी बलूचिस्तान प्रान्त में पुलिस ने कथित रूप से ऑनर किलिंग के नाम पर जिंदा दफन की गईं दो महिलाओं के शव निकाले हैं।
स्थानीय मीडिया ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी गुलाम शबीर शेख के हवाले से कहा है कि पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए दोनों महिलाओं के सगे भाई समेत चार लोगों की निशानदेही पर सोमवार रात कब्र खोदकर शव बाहर निकाले। सूत्रों ने बताया कि पुलिस ने गिरफ्तार किये गए उमैद अली और गौस बख्श उमरानी की निशानदेही पर एक जगह खुदाई करवाई थी मगर वहां कोई शव नहीं मिला।
बाद में उन्हीं लोगों के बताने पर गोपंग लेरी इलाके में एक कब्र से दो शव बरामद किए गए। जिंदा दफन किए जाने की रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना की शिकार हुई महिलाओं की शिनाख्त इशात खातून और माई सियानी के रूप में हुई है। अपनी पसंद के पुरुषों के साथ शादी करने के जुर्म में इन दोनों को क्वेटा से 450 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में बाबाकोट इलाके में पिछले महीने की शुरुआत में जिंदा दफना दिया गया था। पुलिस के मुताबिक दोनों महिलाओं को बगैर कफन पहनाए एक ही कब्र में दफनाया गया था। पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट में एक शव के सिर पर चोट लगने और दूसरे शव के शरीर पर गोलियों के निशान पाए जाने का उल्लेख किया गया है।

बिहार को भारी पड़ी राजनीतिक निष्क्रियता

नई दिल्ली : बिहार में बाढ़ ने जो विनाशलीला पैदा की है उसे केवल कुदरत का कहर बताकर खारिज करना सही नहीं होगा। राजनीतिक अकर्मण्यता और इच्छाशक्ति की कमी भी बर्बादी के लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं। इस दफा कोसी के एकाएक मार्ग बदलने से भले ही संकट खड़ा हुआ हो, मगर राज्य की एक बहुत बड़ी आबादी साल दर साल आने वाली बाढ़ की भीषण मार झेलती रही है।
सवाल उठता है कि पिछले 60 सालों से बिहार और केंद्र में एक के बाद एक आने वाली सरकारों ने कोसी, बागमती, गंडक, कमलाबलान जैसी नदियों का सही वॉटर मैनेजमंट कर इस समस्या के समाधान की दिशा में कोई ठोस कोशिश क्यों नहीं की? इसके उलट राजनेता दोषारोपण और आरोप-प्रत्यारोप में उलझे रहे। बाढ़ राहत के नाम पर जो बड़े घोटाले हुए, वह अलग। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा संकट के लिए राजनीतिक लापरवाही बड़े हद तक जिम्मेदार है। बिहार सरकार कोसी से पैदा इस तबाही की मार झेलने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी। एकाएक कुदरत का कहर देखकर वह हतप्रभ और लाचार हो गई। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ एनवायरनमंट साइंस के प्रफेसर और पूर्व डीन विनोद कुमार जैन का मानना है कि हमारे नेतृत्व वर्ग की आदत रही है कि वह आपदा आने पर उससे जूझती हुई दिखती है, संकट आए ही नहीं इसके लिए उसके पास कोई दूरगामी योजना और वैज्ञानिक नीति नहीं होती। इस दृष्टिकोण से बिहार की अब तक की सरकारें और भी कसूरवार रही हैं, जिन्होंने न सिर्फ बाढ़ को रोकने की दिशा में, बल्कि विकास और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े किसी भी क्षेत्र में लोगों की तरक्की और खुशहाली के लिए कुछ नहीं किया। उनका कहना है कि हम वर्तमान आपदा के लिए किसी एक सरकार को दोषी नहीं मान सकते। जैन के अनुसार बिहार की बाढ़ केंद्र सरकार के लिए भी एक 'वेकअप कॉल' की तरह होनी चाहिए कि अगर प्राकृतिक आपदाओं से लड़ने के लिए साइंटिफिक तरीके से दीर्घकालिक योजना नहीं बनाई जाती, तो देश के अलग-अलग प्रांतों में इंसानों को कुदरत की मार बार-बार झेलनी पड़ेगी। जहां तक बिहार का प्रश्न है तो समय आ गया है कि समस्या को केवल मौजूदा प्ररिप्रेक्ष्य में न देखकर स्थायी निदान के लिए तैयारी की जाए। इसके लिए जरूरी है कि केंद्र सरकार खुद सक्रिय हो और नेपाल के साथ समन्वित प्रयास से बिहार और नेपाल में बाढ़ फैलाने वाली कोसी सहित अन्य नदियों के पानी के प्रबंधन के लिए मास्टर प्लान तैयार करे। इसके लिए वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को फीजिबिलिटी अध्ययन कर पता लगाना होगा कि नेपाल में बड़े डैम या फिर अन्य निर्माणों के जरिये कोसी जैसी युवा नदी के नेचरल फ्लो को किस तरह से मैनिज किया जा सकता है। इसके साथ ही उनका यह भी मानना है कि बिहार के लोगों को मौजूदा विभीषिका से बचाने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर मदद की जरूरत पड़ेगी। बाढ़ से प्रभावित कुल लोगों की संख्या जोड़ दी जाए तो यह एक करोड़ के आसपास बैठती है। ऐसे में अगर केंद्र द्वारा दिए गए हजार करोड़ रुपये से इसमें भाग दिया जाए तो प्रति व्यक्ति करीब 2000 रुपये पड़ते हैं। अपना सब कुछ लुटा चुके लोगों का इतने पैसों से क्या हो पाएगा, यह समझना आसान है।

Monday, September 1, 2008

फरवरी में चलेगा डाक्टर डेथ पर मुकदमा

मेलबर्न। भारतीय मूल के सर्जन जयंत पटेल के मुकदमे की सुनवाई अगले साल फरवरी में होगी। पटेल पर मानव हत्या, शारीरिक रूप से गंभीर क्षति पहुंचाने और धोखाधड़ी से संबंधित कुल 14 आरोप हैं।'द आस्ट्रेलियन' के अनुसार ब्रिसबन की मजिस्ट्रेट अदालत ने अभियोजक डेविड मेरेडिथ को सुनवाई के लिए 9 से 27 फरवरी के बीच का समय दिया है। अदालत ने मुकदमे की सुनवाई के लिए अप्रैल में दो सप्ताह का अतिरिक्त समय भी निर्धारित किया है ताकि प्रारंभिक सुनवाई में किसी वजह से गैरमौजूद रहने वाले विदेशी या अन्य प्रांत के गवाहों को बुलाया जा सके।मेरेडिथ ने बताया कि सुनवाई के दौरान 120 से अधिक गवाहों को बुलाया जा सकता है। पटेल के वकीलों को अदालत में उनके गवाहों की सूची सौंपने के लिए 1 दिसंबर तक का समय दिया गया है।58 वर्षीय सर्जन को इस साल मार्च में अमेरिका के ओरेगन स्थित पोर्टलैंड शहर में उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद जुलाई में उन्हें आस्ट्रेलिया प्रत्यर्पित कर दिया गया था।

नेपाल में नकली नोट छापने वाले काबू

काठमांडू। नेपाल पुलिस ने नकली भारतीय नोट छापने वाले एक रैकेट के भंडाफोड़ का दावा किया है। पुलिस ने इस मामले में बांग्लादेशी मूल के दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अंतरराष्ट्रीय क्राइम नेटवर्क से इनके संबंध होने की संभावना से इनकार नहीं कर रही है।काठमांडू मेट्रोपालिटन पुलिस की अपराध शाखा के एसपी देवेंद्र सुबेदी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि अपनी गतिविधियों के लिए इन्होंने नेपाल को केंद्रबिंदु बनाया हुआ था। जाली नोट यहीं पर बनाए जाते थे। इन्हें वैध नोटों में बदलकर अन्य देशों में भेज दिया जाता था। दोनों संदिग्ध सलमात उल्लाह और जलाल अहमद मध्य काठमांडू के होटल इम्परर से गिरफ्तार किए गए। जाली नोटों का कारोबार ये कपड़ा व्यवसाय की आड़ में चला रहे थे। इनके पास से एक हजार रुपये के 1,908 नोट मिले हैं जो दो सूटकेसों में भरे थे। पुलिस ने इनका पासपोर्ट और मोबाइल फोन जब्त कर लिया है।नेपाल में जाली नोट के प्रचलन पर रोक लगाने के उद्देश्य से पांच सौ और एक हजार के नोटों पर प्रतिबंध है। सुबेदी ने बताया कि इस रैकेट के लोग मलेशिया, थाइलैंड, सिंगापुर और दुबई से आपरेट होते हैं। जाली नोट को वैध बनाने के लिए ये लोग कैसिनो, स्थानीय दुकानों और मनी चेंजर्स का इस्तेमाल करते हैं। पुलिस के मुताबिक दोनों बांग्लादेशी जाली नोट बनाने के विशेषज्ञ हैं। यहां तक कि इनके बनाए जाली नोट और असली नोट के बीच फर्क करना किसी बैंक अधिकारी के लिए भी मुश्किल है।