Wednesday, September 3, 2008
सिमी पर श्वेत पत्र जारी करे केंद्र
सिमी के चार लोग गिरफ्तार
Tuesday, September 2, 2008
बैंकाक में आपातकाल, कमान सेना के हाथ
मच्छर प्रजनन पाए जाने पर चालान
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जिंदा दफन की गईं महिलाओं के शव निकाले
स्थानीय मीडिया ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी गुलाम शबीर शेख के हवाले से कहा है कि पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए दोनों महिलाओं के सगे भाई समेत चार लोगों की निशानदेही पर सोमवार रात कब्र खोदकर शव बाहर निकाले। सूत्रों ने बताया कि पुलिस ने गिरफ्तार किये गए उमैद अली और गौस बख्श उमरानी की निशानदेही पर एक जगह खुदाई करवाई थी मगर वहां कोई शव नहीं मिला।
बाद में उन्हीं लोगों के बताने पर गोपंग लेरी इलाके में एक कब्र से दो शव बरामद किए गए। जिंदा दफन किए जाने की रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना की शिकार हुई महिलाओं की शिनाख्त इशात खातून और माई सियानी के रूप में हुई है। अपनी पसंद के पुरुषों के साथ शादी करने के जुर्म में इन दोनों को क्वेटा से 450 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में बाबाकोट इलाके में पिछले महीने की शुरुआत में जिंदा दफना दिया गया था। पुलिस के मुताबिक दोनों महिलाओं को बगैर कफन पहनाए एक ही कब्र में दफनाया गया था। पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट में एक शव के सिर पर चोट लगने और दूसरे शव के शरीर पर गोलियों के निशान पाए जाने का उल्लेख किया गया है।
बिहार को भारी पड़ी राजनीतिक निष्क्रियता
सवाल उठता है कि पिछले 60 सालों से बिहार और केंद्र में एक के बाद एक आने वाली सरकारों ने कोसी, बागमती, गंडक, कमलाबलान जैसी नदियों का सही वॉटर मैनेजमंट कर इस समस्या के समाधान की दिशा में कोई ठोस कोशिश क्यों नहीं की? इसके उलट राजनेता दोषारोपण और आरोप-प्रत्यारोप में उलझे रहे। बाढ़ राहत के नाम पर जो बड़े घोटाले हुए, वह अलग। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा संकट के लिए राजनीतिक लापरवाही बड़े हद तक जिम्मेदार है। बिहार सरकार कोसी से पैदा इस तबाही की मार झेलने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी। एकाएक कुदरत का कहर देखकर वह हतप्रभ और लाचार हो गई। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ एनवायरनमंट साइंस के प्रफेसर और पूर्व डीन विनोद कुमार जैन का मानना है कि हमारे नेतृत्व वर्ग की आदत रही है कि वह आपदा आने पर उससे जूझती हुई दिखती है, संकट आए ही नहीं इसके लिए उसके पास कोई दूरगामी योजना और वैज्ञानिक नीति नहीं होती। इस दृष्टिकोण से बिहार की अब तक की सरकारें और भी कसूरवार रही हैं, जिन्होंने न सिर्फ बाढ़ को रोकने की दिशा में, बल्कि विकास और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े किसी भी क्षेत्र में लोगों की तरक्की और खुशहाली के लिए कुछ नहीं किया। उनका कहना है कि हम वर्तमान आपदा के लिए किसी एक सरकार को दोषी नहीं मान सकते। जैन के अनुसार बिहार की बाढ़ केंद्र सरकार के लिए भी एक 'वेकअप कॉल' की तरह होनी चाहिए कि अगर प्राकृतिक आपदाओं से लड़ने के लिए साइंटिफिक तरीके से दीर्घकालिक योजना नहीं बनाई जाती, तो देश के अलग-अलग प्रांतों में इंसानों को कुदरत की मार बार-बार झेलनी पड़ेगी। जहां तक बिहार का प्रश्न है तो समय आ गया है कि समस्या को केवल मौजूदा प्ररिप्रेक्ष्य में न देखकर स्थायी निदान के लिए तैयारी की जाए। इसके लिए जरूरी है कि केंद्र सरकार खुद सक्रिय हो और नेपाल के साथ समन्वित प्रयास से बिहार और नेपाल में बाढ़ फैलाने वाली कोसी सहित अन्य नदियों के पानी के प्रबंधन के लिए मास्टर प्लान तैयार करे। इसके लिए वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को फीजिबिलिटी अध्ययन कर पता लगाना होगा कि नेपाल में बड़े डैम या फिर अन्य निर्माणों के जरिये कोसी जैसी युवा नदी के नेचरल फ्लो को किस तरह से मैनिज किया जा सकता है। इसके साथ ही उनका यह भी मानना है कि बिहार के लोगों को मौजूदा विभीषिका से बचाने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर मदद की जरूरत पड़ेगी। बाढ़ से प्रभावित कुल लोगों की संख्या जोड़ दी जाए तो यह एक करोड़ के आसपास बैठती है। ऐसे में अगर केंद्र द्वारा दिए गए हजार करोड़ रुपये से इसमें भाग दिया जाए तो प्रति व्यक्ति करीब 2000 रुपये पड़ते हैं। अपना सब कुछ लुटा चुके लोगों का इतने पैसों से क्या हो पाएगा, यह समझना आसान है।
Monday, September 1, 2008
फरवरी में चलेगा डाक्टर डेथ पर मुकदमा
नेपाल में नकली नोट छापने वाले काबू
काठमांडू। नेपाल पुलिस ने नकली भारतीय नोट छापने वाले एक रैकेट के भंडाफोड़ का दावा किया है। पुलिस ने इस मामले में बांग्लादेशी मूल के दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अंतरराष्ट्रीय क्राइम नेटवर्क से इनके संबंध होने की संभावना से इनकार नहीं कर रही है।काठमांडू मेट्रोपालिटन पुलिस की अपराध शाखा के एसपी देवेंद्र सुबेदी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि अपनी गतिविधियों के लिए इन्होंने नेपाल को केंद्रबिंदु बनाया हुआ था। जाली नोट यहीं पर बनाए जाते थे। इन्हें वैध नोटों में बदलकर अन्य देशों में भेज दिया जाता था। दोनों संदिग्ध सलमात उल्लाह और जलाल अहमद मध्य काठमांडू के होटल इम्परर से गिरफ्तार किए गए। जाली नोटों का कारोबार ये कपड़ा व्यवसाय की आड़ में चला रहे थे। इनके पास से एक हजार रुपये के 1,908 नोट मिले हैं जो दो सूटकेसों में भरे थे। पुलिस ने इनका पासपोर्ट और मोबाइल फोन जब्त कर लिया है।नेपाल में जाली नोट के प्रचलन पर रोक लगाने के उद्देश्य से पांच सौ और एक हजार के नोटों पर प्रतिबंध है। सुबेदी ने बताया कि इस रैकेट के लोग मलेशिया, थाइलैंड, सिंगापुर और दुबई से आपरेट होते हैं। जाली नोट को वैध बनाने के लिए ये लोग कैसिनो, स्थानीय दुकानों और मनी चेंजर्स का इस्तेमाल करते हैं। पुलिस के मुताबिक दोनों बांग्लादेशी जाली नोट बनाने के विशेषज्ञ हैं। यहां तक कि इनके बनाए जाली नोट और असली नोट के बीच फर्क करना किसी बैंक अधिकारी के लिए भी मुश्किल है।
